Friday, September 10, 2010

कामन वेल्थ झेल का थीम सॉन्ग

(कृपया धुन के लिये प्रदीप जी का लिखा प्रसिद्ध गीत “आओ बच्चो तुम्हे दिखाये, झांकी हिन्दुस्तान की, इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान की” पर निम्न पन्क्तियों को समायोजित करने का प्रयास करें…)

आओ तुमको कथा सुनाये, नेता जी के चमत्कार की
खेल खेल में पैसा झपटा, लोगो ने हाहाकार की

टैक्स भी ले लिया…. काम भी नहीं किया

टैक्स भी ले लिया…. काम भी नहीं किया



ये देखो इस सडक का गड्ढा, पहले थोडा हल्का था

पानी तो भर जाता था, पर फिर भी ट्रैफिक चलता था

साईड का खंबा टेढा था, पर बल्ब भी थोडा जलता था

सडक खोद दी, बल्ब फोड दिया, चलने वाला डरता था

सारे गड्ढे सडक हो गये, माया है झोलम झाल की

खेल खेल मे पैसा झपटा, लोगों ने हाहाकार की

बल्ब भी खा गया, खंबा भी खा गया

बल्ब भी खा गया, खंबा भी खा गया



ये देखो इस पुल पर पहले, गाडी ठीक से जाती थी

हिचकोले से खाती थी, और गिरते पड़ते जाती थी

कलेजा मुंह को आता था, और जान पर बन आती थी

ना जाने क्यों अक्सर फिर, जुर्माना पर्ची कट जाती थी

अब तो पैदल जाता हूं मैं, जय हो जाम महान की

खेल खेल में पैसा झपटा, लोगों ने हाहाकार की

पुल भी बंद हुआ, और रोड भी बंद हुआ

पुल भी बंद हुआ, और रोड भी बंद हुआ



ये देखो एक ट्रैक बड़ा सा, साइकल के लिये बनाया था

अड्वेंचर सा लगे इसलिये, थोडा कम घिसवाया था

साइकल बढ़िया चले इसलिये, ट्रैफिक को रुकवाया था

पहले दिन जब चली साइकले, लोगो को बुलवाया था

एक अस्पताल, दो गड्ढे में, जय हो ट्रैक की शान की

खेल खेल में पैसा झपटा, लोगों ने हाहाकार की

लोगों का क्या करना, मेरा ट्रैक तो टेस्ट हुआ

लोगों का क्या करना, मेरा ट्रैक तो टेस्ट हुआ



ये देखो एक मशीन प्यारी, खेलों के लिये लगाई है

केवल बालिग खेले इसको, गजब खेल खिलाई है

अतिथियों के लिये एस्कार्ट्, बाहर से मंगवाई है

“यूज” करें प्लीज आप इसको, बातें भी सिखाई हैं

इन खेलो का नाम ना लेना, बातें हैं ये ज्ञान की

खेल खेल में पैसा झपटा, लोगों ने हाहाकार की

मूसली पावर दम.. पहलवान हैं हम

मूसली पावर दम.. पहलवान हैं हम



चोट लगे जो खेलो में तो, हम सिकाई करवायेंगे.

ढाई हजार की मशीन को हम, चार लाख में लाएंगे

इस्तेमाल वो हो ना हो हम, लाभ तो बतलाएंगे

कुछ तो हमको खाने दो, हम कामन वेल्थ कराएंगे

बाकि सब पर ध्यान न दो, लाज रखो देश सम्मान की

खेल खेल में पैसा झपटा, लोगों ने हाहाकार की

खा गये देश का धन… खा गये देश का धन।

खा गये देश का धन… खा गये देश का धन.
 
किशोर बड्थवाल
आईटी हेड, मदर टेरेसा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट 
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